कीड़े
पांच मंजिल अपार्टमेंट के चौथे माले में हरियाली थी। सबसे पहले आई बहू को बागवानी का शौक था। पूरी बालकनी सुंदर फूलों और पत्तों वाले पौधों वाले छोटे बड़े गमलों से भरी थी। इन्हीं गमलों में से एक में कीड़े का परिवार था। एक दिन एक बच्चा कीड़ा घबराकर अंदर आया और रोने लगा।
‘क्या हुआ?’ मां कीड़े ने पूछा।
‘दीवार पर चढ़े मेरे दोस्त को चिड़िया ले गई’, वह दुखी होकर बोला।
‘कीड़े का जीवन कितना बेकार है।’
‘ऐसी तो कोई बात नहीं है, कीड़े स ही जीते हैं।’
बच्चा कीड़ा मान नहीं रहा, और रोता रहा। मां कीड़े ने कहा,
‘देखो इस दुनिया में कमजोर ताकतवर के लिए कीड़ा है, गरीब अमीर के लिए कीड़ा है। ठीक है, तुम्हें मेरी बातों पर भरोसा नहीं है तो बालकनी में आए लोगों की बातें सुनो।’
दूसरे दिन बच्चा कीड़ा बढ़ी औरत की बातें सुन रहा था।
‘क्यों नहीं निकलेगी? वो क्या घर भला दहेज लाई थी? सिर्फ सफाई का तो ध्यान ही नहीं है? देखा था न तुमने शादी में वो सब कैसे थे, कीड़े मकोड़े से भरे घर से, इतने बड़े घर में जो आ गई है, इतने खाते-पीते घर में आने के लिए किस्मत होनी चाहिए न।’
बुजुर्ग के बेटे के घर में बंद उसके बेटे एक हाथ में अखबार और दूसरे हाथ में फोन लिए बालकनी में आए।
‘तुम्हें याद है, मेरी शादी के बाद मैंने उसे खाने पर बुलाया था, कैसे दूर पड़ा था खाने पर, और आज जब प्रमोशन की बात की तो कहता है तुम्हारे आगे बहुत लोग हैं —, मोटा, और इतना लालची है —-। मुझे उसके पास जाते ही घिन आती है जैसे किसी कीड़े को देख लिया हो, लेकिन बस ठीक है, ऑफिस में तो उसी के साथ काम करना पड़ता है।’
कहते हुए वह फोन लेकर अंदर चल गया।
दोपहर के समय घर की बहू पौधों के लिए पानी लेने आई, उसके साथ आज कोई और भी थी।
‘शादी के पहले हम कितना घूमते थे’ बहू ने कहा।
‘हां, मुझे तो चार कोठे और हम वहां सी-मॉल बहुत याद आता है,’ दूसरी ने कहा।
‘चिंता मत करो हम फिर वैसे ही घूमेंगे, और कुछ दिनों में मेरे पति को प्रमोशन के बाद दूसरे शहर ट्रांसफर पर भेज देंगे।’
‘तो क्या तब भी तुम्हारी सास तो तुम्हें भेजेगी नहीं, यहां से आधे घंटे की सफर करके तुम मेरे पास नहीं आती, हम क्या घूमेंगे।’
बहू ने मुस्कुराते हुए कहा,
‘इनसे कैसे पीछा छुड़ाना है मुझे पता है।’
दोनों मुस्कुरा रहे थे, सहेली ने कहा,
‘हां, हर कीड़े को पर एक दवा काम नहीं करती।’
बच्चा कीड़ा आखिर सोने की कोशिश करने लगा, लेकिन वह दुखी था। मां कीड़े ने उसे सीने से लगाया और कहा,
‘कीड़े जैसा होना गलत नहीं है, ईश्वर ने जिसे जो जीवन दिया है वही ठीक है लेकिन जीना कैसे हैं ये उसने हम पर छोड़ दिया है या अपने होने पर रोओ या फिर अपना सच जानकर समझदार बनो।’
बच्चा कीड़ा समझ गया और अपने आठों हाथ और पैरों को समेटकर सो गया।

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